ऐसा ही एक नाम महाकाल है आजकल हर वाहन पर महाकाल का जिक्र देखने को मिल ही जाता है यदि पौराणिक गाथाओं का जिक्र करे तो शिव के बारह ज्योतिर्लिंगों मे से एक उज्जैन का ज्योतिर्लिंग महाकालेश्वर कहलाता है यहां भी बडा झोल है शिवलिंगों को ज्योतिर्लिंग कहना भी उलझाना ही है क्योंकि उलझेंगे तो ही फंसेगे फसेगे तो ही इनके तथाकथित भगवान बिकेगें।
ऐसे ही महाकाल भी इनके द्वारा स्वघोषित भगवान है जिसके बारे ये क,ख नही जानते बस त्रिदेव के रुपो को घुमा फिरा कर लोगो के सामने पेश करते रहते है इनकी बुद्वि त्रिदेव से उपर नही उठ सकती क्योंकि ये गीता अध्याय 7 के अनुसार मनुष्यों मे नीच और मूढ है जिनका ज्ञान माया ने हर लिया है अर्थात जो कुछ नही जानते निरे मुर्ख है और इनको मानने वाले तथाकथित कट्टर हिन्दु जिन्हें धर्म का एक अक्षर भी नही पता पर धार्मिक भावनाएं बहुत ज्यादा है वो इनके मुफ्त के advertiser है।
शिव सहांरक है मानव जीवन का अंत तमोगुणी शिव द्वारा होता है लेकिन ये काल नही अपितु काल के सबसे छोटे पुत्र है पर यह किसी को क्यो जानना है वासुदेव को कृष्ण के पिता कहो या कृष्ण को वासुदेव कहो!!
हिन्दुओ को बस उलझना है इन्हे समझाने वाले की नही बहकाने वाले की तलाश होती है जो इन्हे समझाने के प्रयासरत है वो जेल मे उम्रकैद की सजा काट रहा है और जो इन्हे बहकाये है वे मोटे मोटे पेट फुलाये मन्दिरों मे शंकराचार्य बने बैठे है।
अंततः महाकाल नाम की कोई शक्ति नही है यह मात्र पण्डो का भ्रमजाल है। शक्ति एक काल है जो सबको मन रुप मे बैठा भ्रमित कर रहा है। यही त्रिदेव का पिता है।यह सब जानने के लिये भगवान रामपाल जी महाराज का सत्संग सुने और लाभ उठाये।
भगवान रामपाल जी महाराज की जय हो जय हो जय हो

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