Friday, July 30, 2021

Food for hungry

 जगतगुरु तत्वदर्शी संत रामपाल जी की प्रेरणा से उनके शिष्य आपदा की इन परिस्थितियों में लोगों की मदद के लिए आगे आ रहे हैं।


संत रामपाल जी की सीख है :-

जो अपने सो ओर के, एकै पीड़ पिछान। 

भुखियां भोजन देत हैं, पहुचेगें प्रवान।।


सरलार्थ :- मानव को धर्म की प्रेरणा देते हु



ए संत गरीबदास जी ने कहा है कि जैसे आपको भूख या प्यास लगी हो, उस समय आपको कैसा लगता है? कैसा संकट सामने होता है? उस समय आप जी को कोई भोजन या पानी खिल-पिला दे तो आपको कितनी खुशी होगी? इसलिए बताया है कि जैसा कष्ट आपको था, वैसा ही अन्य भूखे-प्यासे को हुआ जानकर भोजन-पानी अवश्य खिलाना-पिलाना चाहिए। इससे आध्यात्मिक व भौतिक दोनों लाभ मिलते हैं जो भूखों को भोजन तथा प्यासे को जल देते हैं। वे प्रवान अर्थात् आध्यात्म की अन्तिम मंजिल तक पहुँचेंगे अर्थात् उनकी साधना प्रवान चढ़ेगी। (सफल होगी)

                     

राबिया की कथा ⤵️

एक राबिया नाम की मुसलमान बहन थी। उसकी आयु लगभग 50 वर्ष की हुई तो अपने पति से आज्ञा लेकर हज करने के लिए मक्का को पैदल रवाना हुई। कुछ यात्रा करने के पश्चात् उसे एक कुंआ दिखाई दिया। उस कुंए के पास एक कुतिया बहुत प्यासी खड़ी थी। राबिया को देखकर वह कुतिया उसकी ओर गई। फिर कुंए की ओर गई। कुतिया के बच्चे थे जिनकी आँखें भी नहीं खुली थी। राबिया को माजरा समझते देर नहीं लगी। झटपट कुंए पर गई तो देखा कोई जल निकालने का पात्र (रस्सा-बाल्टी) नहीं था। किसी के हाथ से छूट जाने के कारण कुंए में गिरी हुई थी। राबिया ने प्यासी कुतिया को पानी पिलाने के लिए अपने सिर के बाल उखाड़े और रस्सी बांटी (बनाई)। अपने शरीर के कपड़े उतारे जो खादी के बने मोटे कपड़े थे। अपनी चुनरी से शरीर को ढ़का और बालों से बनाई रस्सी से कपड़े बाँधकर पानी निकाला और कुंए के साथ में रखे ठीकरे में (मिट्टी के घड़े का टूटा आधा या छोटा-बड़ा भाग ठीकरा कहा जाता है।) कपड़े निचोड़कर पानी डाल दिया। ऐसा तीन-चार बार करके कुत्ती की प्यास बुझाकर उसके बच्चों तथा उसके प्राणों की रक्षा की। गीले कपड़े पहनकर मक्का की ओर चलना चाहा तो देखा कि मक्का तो कुएं के साथ खड़ा है। भक्तमति राबिया स्वपन की तरह मक्के में प्रवेश कर गई। पवित्र मक्का (मुसलमानों का मंदिर) हवाई जहाज की तरह उड़ चला। फिर अपने यथास्थान पर स्थापित हो गया। अपने स्थान से अचानक अंतर्ध्यान हुए 'मक्के' को देखकर हज यात्री आश्चर्यचकित थे कि यह क्या अपसगुन है? हमारी किस्मत खराब है। इस कारण से मक्का ही अदृश्य हो गया। कुछ देर में मक्का उसी स्थान पर आकर स्थापित हो गया। आकाशवाणी हुई कि मक्का अल्लाह के हुक्म (आदेश) से एक पवित्र आत्मा राबिया को लाने गया था। मक्का से वह कुंआ तीन मंजिल अर्थात् 60 मील (90 किमी) दूर था। आकाशवाणी में यह भी कहा गया कि राबिया ने प्यासों को पानी पिलाकर असली (वास्तविक) हज की है। भ्रमित व्यक्ति तो पशु-पक्षियों को मारकर खाते हैं, उसे धर्म मानते हैं। धर्म तो पशु-पक्षियों तथा अन्य जीवों-मानव के प्राणों की रक्षा राबिया की तरह करने से होता है। यह वास्तव में हज है।


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कबीर, साहेब से सब होत है, बंदे से कछु नांहि।

राई से पर्वत करे, पर्वत से फिर राई।।


परमेश्वर कबीर जी अपने बच्चों के उद्धार के लिए शीघ्र ही समाज को तत्वज्ञान द्वारा वास्तविकता से परिचित करवाएंगे, फिर पूरा विश्व संत रामपाल जी महाराज के ज्ञान का लोहा मानेगा। आप भी परम संत संत रामपाल जी के सत्संग Satlok Ashram यूट्यूब चैनल पर श्रवण करें



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