पखा पाखी के कारने, सब जग रहा भुलान ।
निरपख होयके हरि भजे, सोई संत सुजान ॥
कबीरा कुंआ एक है, पानी भरें अनेक ।
बर्तन में ही भेद है, पानी सबमें एक ॥
कबीर, जीवन तो थोड़ा ही भला, जै सत सुमरन होय।
लाख बरस का जीवना, लेखे धरै ना कोय।।
सत्य साधना बिना बहुत लंबी उम्र हमारे कोई काम नहीं आएगी क्योंकि इस लोक में दुख ही दुख है।
पूर्ण संत से नाम उपदेश लेकर नाम की कमाई करके हम सतलोक के अधिकारी हो सकते हैं। वर्तमान में वह पूर्ण संत रामपाल जी महाराज हैं।
और संत सब कूप हैं, केते झरिता नीर।
दादू अगम अपार हैं, दरिया सत्य कबीर।।




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