Sunday, August 8, 2021

पूर्ण मोक्ष




पवित्र कबीर सागर के ’’कबीर वाणी’’ अध्याय पृष्ठ 137 तथा ’’जीव धर्म बोध’’ पृष्ठ 1937 पर कबीर परमेश्वर जी ने संत श्री धर्मदास जी को तीनों समय की दीक्षा देकर कहा था :-


धर्मदास मेरी लाख दुहाई, सारशब्द कहीं बाहर न जाई।

सारशब्द बाहर जो पड़ही, बिचली पीढ़ी हंस न तिरही।।

यह पृष्ठ 1937 ’’जीव धर्म बोध’’ में लिखा हैः-

धर्मदास मेरी लाख दोहाई, मूल (सार) शब्द बाहर न जाई।

पवित्र ज्ञान तुम जग में भाखो, मूल ज्ञान गोई (गुप्त) तुम राखो।।

मूल ज्ञान तब तक छुपाई, जब तक द्वादश पंथ न मिट जाई।।

यह ’’कबीर वाणी’’ पृष्ठ 137 पर लिखा है।

इस प्रकार साधना करने से पूर्ण मोक्ष होगा जो श्रीमद्भगवत गीता अध्याय 18 श्लोक 62 में गीता ज्ञान दाता ने पूर्ण मोक्ष प्राप्ति के लिए अपने से अन्य परमेश्वर की शरण में जाने को कहा है कि हे अर्जुन! सर्व भाव से तू उस परमेश्वर की शरण में जा। उस परमेश्वर की कृपा से ही तू परम शान्ति को तथा सनातन परमधाम को प्राप्त होगा। गीता अध्याय 15 श्लोक 4 में भी गीता ज्ञान दाता ने अपने से अन्य परमेश्वर की भक्ति करने और सनातन पद को प्राप्त करने को कहा है कि :-

 तत्त्वज्ञान की प्राप्ति के पश्चात् परमेश्वर के उस परम पद (सनातन परमधाम) की खोज करनी चाहिए जहाँ जाने के पश्चात् साधक लौटकर संसार में कभी नहीं आते। उस परमेश्वर की भक्ति करो जिसने संसार रूपी वृक्ष की रचना की है। (गीता अध्याय 15 श्लोक 4)

भावार्थ :- पूर्ण मोक्ष उसी को कहते हैं जिसको प्राप्त करके साधक पुनः संसार में जन्म धारण नहीं करता। परमशान्ति वही है, कभी जन्म-मरण के चक्र में न गिरे, सदा सुख सागर स्थान सत्यलोक में रहे, वह पूर्ण परम गति कही जाती है।

ऊपर स्पष्ट हुआ कि जन्म-मरण का रोग किन मन्त्रों की साधना से समाप्त होता है।

पवित्र कबीर सागर में ’’ज्ञान सागर’’ प्रथम अध्याय है। इसके 106 पृष्ठ हैं। वास्तव में सर्व अध्याय भिन्न पुस्तक रूप में हैं। कबीर सागर में 40 पुस्तकों को इकट्ठा जिल्द किया है। प्रिन्ट कराने से पहले यह एक ही कबीर सागर था जो श्री धर्मदास जी द्वारा हाथ से लिखा था। उसके पश्चात् समय अनुसार अन्य कबीर जी के अनुयाईयों ने कई कॉपी हाथ से लिखी थी। जिस कारण से प्रत्येक ने भिन्न-भिन्न अध्यायों को पुस्तक रूप बना लिया जो उठाने-पढ़ने में सुविधाजनक थे। उसके पश्चात् इन सबको प्रिन्ट करते समय एक पवित्र कबीर सागर बना दिया गया और अपनी बुद्धि अनुसार हाथ से लिखते समय यानि कॉपी करते समय वाणी काट दी, कुछ मिला दी। जिस कारण से परमेश्वर कबीर जी ने वही यथार्थ ज्ञान अपनी प्यारी आत्मा संत गरीबदास (गाँव-छुड़ानी वाले) को प्रदान किया है। उनको अपने सत्यलोक में लेकर गए जैसे श्री धर्मदास जी को, श्री नानक जी को लेकर गए थे। संत गरीबदास जी ने आँखों देखा परमेश्वर का परिचय अपनी अमृतवाणी में लिखा है जो कबीर सागर से भी अधिक वाणी हैं और सत्य तथा बिना परिवर्तन के हैं।

 परमेश्वर कबीर जी तो अन्तर्यामी हैं। उनको पता था कि यदि इस ग्रन्थ में छेड़छाड़ कर दी गई तो हमारा ज्ञान, हमारी महिमा प्रमाणित नहीं हो पाएगी। 


••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••••

आध्यात्मिक जानकारी के लिए आप संत रामपाल जी महाराज जी के मंगलमय प्रवचन सुनिए। सतलोक आश्रम YOUTUBE चैनल पर प्रतिदिन 7:30-8.30 बजे। संत रामपाल जी महाराज जी इस विश्व में एकमात्र पूर्ण संत हैं। आप सभी से विनम्र निवेदन है अविलंब संत रामपाल जी महाराज जी से नि:शुल्क नाम दीक्षा लें और अपना जीवन सफल बनाएं।

https://online.jagatgururampalji.org/naam-diksha-inquiry

3 comments:

  1. God Kabir is the bestower of happiness.
    He alone is worthy of being worshipped. The world is milsled by Kaal/Satan. Only a true Guru can provide a true way to worship God Kabir.

    ReplyDelete
  2. उलटे सुलटे बचन के, सीस ना मानै दुख।
    कहै कबीर संसार मे, सो कहिये गुरु मुख।।

    ReplyDelete
  3. सतलोक अविनाशी लोक है। जहाँ ऊंच-नीच की अवधारणा नहीं है। इस कारण द्वेष उत्पन्न नहीं होता।
    जबकि पृथ्वी लोक पर ऊंच-नीच, छोटे-बड़े की आग में सारा संसार जल रहा है।

    ReplyDelete

अनुपूर्णा मुहिम पर सम्पूर्ण लेख - संत रामपाल जी महाराज द्वारा चलाया गया एक मानवता का मिशन

🔖 लेख का रूपरेखा (Outline) H1: अनुपूर्णा मुहिम: संत रामपाल जी महाराज की एक अनोखी पहल H2: परिचय: क्या है अनुपूर्णा मुहिम? H3: नाम क...