प्रत्येक युग में नाद से ही पंथ का प्रचार व प्रसिद्धि हुई है।
प्रमाण :- 1 सत्ययुग में कबीर जी सत सुकृत नाम से प्रकट हुए थे। उस समय सहते जी को शिष्य बनाया था। उससे प्रसिद्धि हुई है।
2 त्रोता में बंके जी को शिष्य बनाया था, उससे प्रसिद्धि हुई थी।
3 द्वापर में चतुर्भुज जी को शिष्य बनाया था, उससे सत्यज्ञान प्रचार हुआ था।
4 कलयुग में धर्मदास जी को शिष्य बनाया था जिनके कारण ही वर्तमान तक कबीर पंथ की प्रसिद्धि तथा विस्तार हुआ है।
अनुराग सागर पृष्ठ 140 पर वाणी है :-
जब-जब काल झपटा लाई। तबै-तबै हम होये सहाई।।
भावार्थ है कि काल ने धर्मदास की छठी पीढ़ी वाले पर झपट्टा मारा तो परमेश्वर जी ने अपनी प्यारी आत्मा संत गरीबदास जी (गाँव-छुड़ानी, जिला-झज्जर, प्रान्त-हरियाणा) को विक्रमी संवत् 1784 (सन् 1727) में गाँव के जंगल में मिले थे। धर्मदास जी की तरह सतलोक लेकर गए थे, वापिस छोड़ा था। उन्होंने भी परमेश्वर कबीर जी की महिमा का अनमोल प्रचार किया। महिमा का ग्रन्थ बनाया, परंतु उस पंथ में भी काल झपटा मार चुका है। सब राम-कृष्ण के पुजारी हैं, पाठ संत गरीबदास जी की वाणी का करते हैं। एक मेरे पूज्य गुरूदेव स्वामी रामदेवानंद जी ही कबीर जी के यथार्थ ज्ञान से परिचित थे। उसके पश्चात् मुझ दास (रामपाल दास) पर दया करके यथार्थ ज्ञान दिया है। यथार्थ भक्ति विधि सत्य भक्ति मंत्र तथा यथार्थ सम्पूर्ण अध्यात्मिक ज्ञान मेरे को प्रदान किया। अब विश्व सत्य भक्ति करेगा। सत्ययुग जैसा वातावरण होगा। यदि धर्मदास जी के बिन्द वाले महंत तथा उनके शिष्य जो महंतों का वचन अंश यानि शिष्य हैं, वे मेरे पास (रामपाल दास) से दीक्षा लेकर गुरू मर्यादा में रहकर भक्ति करेंगे तो वे भी पार हो जाएंगे।
कबीर परमेश्वर जी ने अनुराग सागर पृष्ठ 141 पर कहा है :-
कहाँ निर्गुण कहाँ सरगुण भाई। नाद बिना नहीं चलै पंथाई।।9
यह विधि तेरे ब्यालिस तारैं। जब-जब गिरै फेर संभारैं।।10
नाद का वचन जो बिन्द न मानै। देखत जीव काल धर तानै।।11
कहाँ नाद कहाँ बिन्द रे भाई। नाम भक्ति बिनु लोक न जाई।।12
भावार्थ :- वाणी नं. 9,10 :- हे धर्मदास! यदि तेरे बिन्द वाले मेरे नाद वाले से दीक्षा ले लेंगे तो उनका भी कल्याण हो जाएगा। इस विधि से तेरी बयालीस पीढ़ी को पार करूँगा।
वाणी नं. 11 :- नाद की बात को यदि तेरा बिन्द नहीं मानेगा तो देखते-देखते उसको काल सतावैगा।
वाणी नं. 12 :- इसमें तो स्पष्ट कर दिया है कि क्या बिन्द और क्या नाद है, यदि सच्चा नाम लेकर भक्ति नहीं करेंगे तो कोई भी पार नहीं हो पाएगा।
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