Saturday, July 31, 2021

सौभरी ऋषि

 बहुत समय तक साधना करने के बाद सौभरी ऋषि ने एक तालाब पर देखा कि एक मुखिया मगरमच्छ के ऊपर उसका पुरा परिवार बेटे पोते अटखैलिया कर रहा था तो उसके मन में भी परिवार की लालसा और मोह जागृत हुआ उस ने राज्य के राजा माधन्ता चक्रवति के पास जाकर कहा राजन मुझे विवाह करना है मैं आपकी राजकुमारी से विवाह करना चाहता हुं राजा ने सोचा किस बेटी को इस अधेड से विवाह के लिये कहुं मैं‌ मना कर दुंगा तो यह श्राप दे देगा और हंसता खेलता राज तबाह हो जायेगा ।

 राजा ने कहा ऋषिवर आप जिस कन्या को पसंद आ जाओगे मैं उसी से विवाह करवा दूंगा । सौभरी ने अपनी सिद्धी से नवयुवक सी सुंदर काया बना कर उसकी 50 बेटियों के समक्ष विवाह प्रस्ताव रखा तो सारी बेटियों ने हां भर विवाह करा लिया । कुछ वर्ष बाद मान्धता राजन अपनी पुत्रियों की कुशलक्षेम जानने सौभरी के महल गया  हर पुत्री सौभरी से खुश थी और सौभरी बडाई करती मिली । सौभरी बेटो पोतो के साथ आनन्द से जीवन काट रहा था  राजा ने कहा ऋषि आप की लीला आप ही जानो  

कुछ दिनो बाद सौभरी वृद्ध होने लगा और उसे फिर याद आया वौ मगरमच्छ जिसको देख सौभरी ने विवाह करा फिर उसने सोचा कि भक्ति जो कि वो खर्च कर दी और आगे अब बनी नही इसलिये मेरा तो जीवन बेकार हो गया इसलिये कहा जाता है भक्ति घर परिवार में रहते हुये करनी है । वो भी शास्त्रानुकुल वरना मृत्यु समय पर पछताने से कुछ नही होना । 

( सत्संग लिंक ) https://youtu.be/a0mMoyeDav0




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