एक राजा ने पुहलो नामक भक्तमति के ज्ञान विचार सुने और उनके ज्ञान से बहुत प्रभावित हुआ और महल जाकर अपनी तीनो रानियों के समक्ष पुलहो के विचारो की तारीफ की यह बात तीनो रानियों को अच्छी नही लगी कि हमारे राजा किसी अन्य स्त्री की तारीफ अच्छी नही लगी इसलिये उन्होने पुलहो को देखने की इच्छा व्यक्त की । राजा ने अपने घर पुलहो को सत्संग करने के लिये आमन्त्रित किया पुलहो ने नियत तिथी को संत्सग करने को तय करा । तीनो रानियां एक दुसरे से बढचढ कर श्रृंगार और गहने आदि पहन कर पुलहो का मिलने गयी तो पुलहो को देखा वो साधारण वस्त्र मैला सा पहना था रानिया खिल खिलाकर हंस पडी और बोली हम तो सोच रहे थे कि पुलहो बहूत सुंदर होगी । यह है वो पुहलो जिसकी राजा इतनी तारीफ कर रहे थे ।
इतना सुनते ही पुलहो बोली
" वस्त्र आभुषण तन की शोभा , यह तन काचो भांडो ।
भक्ति बिना बनोगी कुत्तिया ,राम (परमेश्वर)भजो ना रांडो"
अर्थात तुम जिस सुंदर शरीर पर नखरे कर रही हो वो भक्ति के लिये मिला है अपना जीवन भी गुजारो और भक्ति भी करो वरना आज मर गयी तो कल कुत्तिया बनना पडेगा वहां वस्त्र विहिन यहां वहां घुमोगी ।
पुरा विवरण जानने के लिये पढे - https://www.jagatgururampalji.org/bhakti_se_bhagwan_tak.pdf

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