Saturday, August 14, 2021

Nashe se azadi


गरीब दास जी ने बताया है कि 

गरीब, परद्वारा स्त्री का खोलै। सत्तर जन्म अंधा हो डोलै।।

मदिरा पीवै कड़वा पानी। सत्तर जन्म श्वान के जानी।।

जो व्यक्ति अन्य स्त्री से अवैध सम्बन्ध बनाता है, वह 70 जन्म अंधा होता है। शराबी सत्तर जन्म तक कुत्ते के जन्म पाता है।

- संत रामपाल जी महाराज


🌬️नशा करता है नाश 

सौ नारी जारी करै, सुरापान सौ बार। एक चिलम हुक्का भरै, डूबै काली धार।। 

सौ स्त्रियों से भोग करे और सौ बार शराब पीऐ, उसे जो पाप लगता है, वह पाप एक चिलम भरकर हुक्का पीने वाले को देने वाले को लगता है।


🌬️संत गरीबदास जी कहते हैं

मदिरा(शराब) पीवे कड़वा पानी,

सत्तर जन्म कुत्ते के जानी।।

शराब पीने से 70 जन्म तक कुत्ता बनने की सजा मिलेगी। ये खुद परमात्मा ने बताया है। आज ही त्यागें ऐसी बुरी वस्तु को।


🌬️संत गरीबदास जी अपनी वाणी में कहते है-

सुरापान मद्य मांसाहारी, गवन करे भोगे पर नारी।

सत्तर जन्म कटत हैं शीशम, साक्षी साहिब हैं जगदीशम।।

सुरापान व मांस आदि खाने का अंजाम जब इतना बुरा है तो इससे त्यागने में ही भलाई है।


🌬️नशा चाहे शराब, सुल्फा, अफीम, हिरोईन आदि-आदि किसी का भी करते हो, यह आपका सर्वनाश का कारण बनेगा।

इस का किसी भी शास्त्र में उल्लेख नहीं कि नशा करें।

यह मानव समाज को बर्बाद कर रहा है।


🌬️नशा करने से नाश होता है। इसलिए पूर्ण संत के सत्संग सुनें जिससे गृह क्लेश भी समाप्त हो जाता है।


🌬️शराब मानव जीवन बर्बाद करती है। इस बारे में परमात्मा कबीर साहेब जी कहते हैं-

भांग तम्बाकू छोतरा, आफू और शराब

गरीबदास कौन करे बंदगी, ये तो करें खराब।

शराब भक्ति का नाश करती है। इसे त्यागने में ही भलाई है।


🌬️ शराब गृह क्लेश को जन्म देती है व आर्थिक, शारीरिक, सामाजिक बदहाली अपने साथ लेकर आती है।

इससे दूरी रखना ही समझदारी है।


🌬️ यदि आप शराब की लत नहीं छोड़ पा रहे हैं और नशा मुक्ति केंद्र से भी आपको इस बारे में सफलता नहीं मिली है।

तो निराश न हों संत रामपाल जी महाराज से उपदेश लेकर आप इसे बड़ी आसानी से छोड़ सकते हैं।


🌬️ नशा सर्वप्रथम तो इंसान को शैतान बनाता है फिर शरीर का नाश हृदय है। शरीर के चार महत्वपूर्ण अंग हैं फेफड़े, लीवर, गुर्दे, हृदय। शराब सबसे प्रथम इन चारों अंगों को खराब करती है। इन सब से निजात पाने के लिए संत रामपाल जी महाराज के सत्संग अवश्य सुनें।


🌬️शराब में ऐसा नशा है जो अनमोल मानव जीवन को बर्बाद कर देती है। सद्भगति में ऐसा नशा है जो मर्यादा में रहकर की जाए तो जीवन को आबाद कर देती है। फैसला आपको करना है।


🌬️शराब व अन्य विकारों में मानव जीवन को उलझाकर मानव को सद्भगति से दूर रखना काल की सुनियोजित चाल है।

भोली जनता काल कसाई की चाल में फंस रही है।


🌬️शराबी व्यक्ति का शरीर रोगों की खान बन जाता है। जिस कारण उनके परिवार को उनके नशे और बीमारियों पर खर्च के कारण दोहरी मार पड़ती है।


🌬️शराब एक ऐसी खतरनाक बुराई है जो बसे बसाए खुशहाल परिवार को भी उजाड़ देती है, तथा धन व बल दोनों का नाश करती है।


🌬️शराबी व्यक्ति विचार करें

आज किसी की भी संतान उस समय बहुत गर्व महसूस करती है जब उसे अपने स्वावलंबी पिता का परिचय देना हो।

शराबी परिजन का परिचय देने में बच्चे हीन भावना का शिकार होते हैं।


🌬️भगवान के संविधान अनुसार एक बार शराब पीने वाले के 70 जन्म कुत्ते के होते हैं।


🌬️देवता भी मनुष्य जीवन को तरसते हैं क्योंकि मोक्ष मनुष्य जीवन में ही हो सकता है।

और परमात्मा का विधान है कोई भी नशा करने वाला मोक्ष प्राप्त नहीं कर सकता और आप इस अनमोल जीवन को शराब पीने में बर्बाद कर रहे हो।


🌬️शराब के पीने से कैंसर जैसी भयानक बीमारियाँ होती हैं। इससे मनुष्य हरदम दुःखी होता है। नए नए रोग होते हैं नशे की वजह से।


🌬️नशा हमारे भगति मार्ग में सबसे बड़ा बाधक है।

  - संत रामपाल जी महाराज


🌬️सतभक्ति से शराब छूट सकती है।

आज संत रामपाल जी से उपदेश लेकर बहुत लोग शराब छोड़ चुके हैं और उनके परिवार में खुशहाली आई है

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